करोड़ों की सफाई, फिर भी जलभराव की गारंटी हर मानसून में डूबता कानपुर, जवाबदेही से बचता तंत्र

करोड़ों की सफाई, फिर भी जलभराव की गारंटी हर मानसून में डूबता कानपुर, जवाबदेही से बचता तंत्र

हर साल सफाई के दावे, हर बरसात में डूबता कानपुर, फिर बैठकों में उलझी जलभराव की समस्या


(Today crime news)

उत्तर प्रदेश कानपुर। मानसून की आहट के साथ नगर निगम में एक बार फिर नाला सफाई की समीक्षा बैठकों का दौर शुरू हो गया है। मंगलवार को महापौर प्रमिला पांडेय और नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय की संयुक्त अध्यक्षता में हुई बैठक में बड़े और छोटे नालों की सफाई की प्रगति की समीक्षा की गई। अधिकारियों को लंबित कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश भी दिए गए। लेकिन हर साल की तरह इस बार भी सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब करोड़ों रुपये खर्च कर नालों की सफाई कराई जाती है, तो आखिर कानपुर को जलभराव से स्थायी राहत क्यों नहीं मिल पाती? नगर निगम के आंकड़े बताते हैं कि शहर के 220 बड़े नालों में से अभी तक केवल 67 नालों की सफाई पूरी हुई है, जबकि 153 नाले अभी भी सफाई की प्रक्रिया में हैं। वहीं 1485 छोटे नालों में से 427 नालों की सफाई शेष है। बारिश सिर पर खड़ी है और तैयारियां अब भी अधूरी हैं।

हैरानी की बात यह है कि नाला सफाई कानपुर में कोई नई प्रक्रिया नहीं है। हर वर्ष टेंडर जारी होते हैं, ठेकेदारों को भुगतान होता है, निरीक्षण होते हैं और प्रेस विज्ञप्तियों में दावों की भरमार रहती है। लेकिन पहली तेज बारिश के साथ ही शहर के प्रमुख चौराहे, बाजार और आवासीय इलाके जलभराव की गिरफ्त में आ जाते हैं। सड़कें तालाब में बदल जाती हैं और आम जनता को घंटों जाम, गंदगी और अव्यवस्था का सामना करना पड़ता है।

बैठक में महापौर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि नालों से निकाली गई सिल्ट चार से पांच दिनों के भीतर हर हाल में उठाई जाए। दरअसल, यही सिल्ट वर्षों से सफाई व्यवस्था की सबसे कमजोर कड़ी साबित होती रही है। नालों से निकला कीचड़ कई दिनों तक सड़कों के किनारे पड़ा रहता है और पहली बारिश में फिर नालों में पहुंचकर पूरी सफाई व्यवस्था को बेअसर कर देता है।

अब सवाल केवल सफाई का नहीं, बल्कि जवाबदेही का भी है। यदि हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद वही इलाके जलभराव से जूझते हैं, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? कानपुर की जनता अब बैठकों और दावों से ज्यादा जमीनी नतीजे देखना चाहती है। क्योंकि शहर वर्षों से एक ही चक्र में फंसा हुआ है, बारिश से पहले नाला सफाई का शोर और बारिश के बाद जलभराव पर सफाई देने का  दौर  दुरुस्त किया जाए।

आंकड़ों में नाला सफाई की हकीकत

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 बड़े नाले (अभियंत्रण विभाग)

कुल नाले : 220

साफ हो चुके : 67

अभी शेष/प्रगति पर : 153

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 छोटे नाले (स्वास्थ्य विभाग)

कुल नाले : 1485

सफाई पूर्ण : 961

प्रगति पर : 97

अभी अवशेष : 427

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जनता के मन में उठ रहे 5 बड़े सवाल

हर साल नाला सफाई पर कितना खर्च होता है?

 सफाई के बाद भी वही इलाके जलभराव की चपेट में क्यों आते हैं?

नालों से निकाली गई सिल्ट समय पर क्यों नहीं उठती?

सफाई कार्य की गुणवत्ता की निगरानी कौन करता है?

 करोड़ों खर्च होने के बाद भी जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

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 महापौर के प्रमुख निर्देश

एक सप्ताह में बड़े नालों की सफाई पूरी करें।

छोटे नालों की सफाई 15 दिन में समाप्त करें।

निकाली गई सिल्ट 4-5 दिन के भीतर हटाई जाए।

नगर निगम भूमि से अवैध कब्जे हटाए जाएं।

मोहर्रम और जगन्नाथ रथयात्रा मार्गों को दुरुस्त किया जाए

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